Welcome to the world of sugar free joy!
Low Carb Sugar-Free Sweets & Cakes
Artinci was born out of Aarti's and Sumit's (Artinci's founders) abiding love for great-tasting dessert, while helping them stay committed to their health goals as well. As a result, Artinci makes delicious desserts with zero sugar, that are science and evidence-backed.
Aarti and Sumit come from a family of three generations of diabetics. They were themselves diagnosed pre-diabetic in 2012, and right there began a lifelong quest of a healthy, active lifestyle, including healthy swaps in food
Sugar free Sweets & Cakes
Sugar-Free Kaju Katli — 60% Premium Cashews, Stevia Sweetened | Artinci
Vanilla & Chocolate Marble Sugar free Cake - Diabetic-Friendly, Keto, Gluten-Free (contains egg)
Aarti Laxman (Founder)
Artinci is founded by Aarti Laxman, a certified Metabolic coach in the Low-Carb Nutrition & Metabolic Health domain from dLife.in, India’s only legally tenable course in this subject—recognized by the NSDC (under the Ministry of Skill Development & Entrepreneurship, Govt. of India). It’s also internationally accredited by the CPD Standards Office UK, with a global record of 144 CPD hours—the highest for any course of its kind. The accreditation is both nationally valid and globally recognised in over 50+ countries..
Festive Gifting in Artinci
Let customers speak for us
All about Sugar and sugar-free
प्रोबायोटिक्स ऐसे जीवित लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं, जो आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। इन्हें सही मात्रा में लेने से पाचन स्वास्थ्य और समग्र सेहत को लाभ मिल सकता है।apollohospitals प्रोबायोटिक्स के प्रमुख फायदे 1. पाचन बेहतर बनाने में मदद प्रोबायोटिक्स भोजन को पचाने और पोषक तत्वों के अवशोषण में सहायता कर सकते हैं। ये आंतों में हानिकारक बैक्टीरिया की अत्यधिक वृद्धि को रोकने में भी मदद करते हैं।thehealthsite 2. कब्ज और दस्त में राहत कुछ प्रोबायोटिक स्ट्रेन कब्ज, दस्त और एंटीबायोटिक लेने के बाद होने वाली पाचन समस्याओं को कम करने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, हर व्यक्ति पर इनका असर अलग हो सकता है।apexhospitals 3. आंतों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी आंतों में अच्छे और खराब बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ने पर गैस, पेट फूलना और अनियमित मल त्याग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। प्रोबायोटिक्स इस संतुलन को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। 4. रोग-प्रतिरोधक क्षमता को सहयोग आंतों का स्वास्थ्य शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ा होता है। प्रोबायोटिक्स प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सहयोग दे सकते हैं, लेकिन इन्हें किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।apollohospitals 5. कुछ लोगों में गैस और पेट फूलना कम हो सकता है कुछ विशेष प्रोबायोटिक स्ट्रेन आईबीएस जैसी स्थितियों में पेट फूलने, गैस और असहजता को कम करने में मदद कर सकते हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर रहता है।onlymyhealth प्रोबायोटिक्स के अच्छे स्रोत प्रोबायोटिक्स प्राकृतिक रूप से इन खाद्य पदार्थों में मिल सकते हैं: सादा दही और घर का बना दही। छाछ, जिसमें अतिरिक्त चीनी न हो। इडली और डोसा जैसे कुछ फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ। कांजी, किमची और सॉकरक्राट जैसे फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ। डॉक्टर की सलाह से लिए गए प्रोबायोटिक सप्लीमेंट। दही या अन्य उत्पाद खरीदते समय लेबल पर “live and active cultures” देखें और मीठे फ्लेवर्ड उत्पादों की जगह बिना चीनी वाला विकल्प चुनें। सावधानियां प्रोबायोटिक्स आमतौर पर स्वस्थ लोगों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों को शुरुआत में गैस या पेट फूलने की समस्या हो सकती है। गंभीर बीमारी, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, गर्भावस्था या अस्पताल में इलाज चलने की स्थिति में प्रोबायोटिक सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। निष्कर्ष प्रोबायोटिक्स पाचन स्वास्थ्य, आंतों के बैक्टीरिया के संतुलन और कुछ पाचन संबंधी समस्याओं में मदद कर सकते हैं। इन्हें संतुलित आहार, पर्याप्त फाइबर, पानी, नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ लेना अधिक फायदेमंद हो सकता है।
दही के अलावा कौन से प्रोबायोटिक फूड्स खा सकते हैं?
प्रोबायोटिक्स ऐसे लाभकारी जीवित सूक्ष्मजीव होते हैं जो आंतों के स्वास्थ्य और पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। दही के अलावा भी कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फर्मेंटेड फूड्स प्रोबायोटिक्स के अच्छे स्रोत हैं।medanta+1 1. छाछ छाछ दही से तैयार होने वाला हल्का और हाइड्रेटिंग पेय है। इसमें नमक, भुना जीरा और पुदीना मिलाकर इसे गर्मियों में लिया जा सकता है। बाजार की मीठी फ्लेवर्ड छाछ के बजाय सादी छाछ चुनें। 2. कांजी कांजी एक पारंपरिक उत्तर भारतीय फर्मेंटेड ड्रिंक है, जिसे काली गाजर, चुकंदर, पानी और सरसों के बीज से बनाया जाता है। इसे कुछ दिनों तक फर्मेंट करने के बाद पिया जाता है।medanta 3. इडली और डोसा इडली और डोसे का बैटर चावल और उड़द दाल को भिगोकर फर्मेंट करने से तैयार होता है। फर्मेंटेशन से बैटर में लाभकारी सूक्ष्मजीव विकसित हो सकते हैं। इन्हें संतुलित भोजन बनाने के लिए सांभर और सब्जियों के साथ खाएं। 4. प्राकृतिक अचार बिना सिरके और रासायनिक प्रिजर्वेटिव के नमक से फर्मेंट किया गया घर का बना अचार प्रोबायोटिक फूड हो सकता है। हालांकि, अचार में नमक अधिक होता है, इसलिए इसे कम मात्रा में खाना बेहतर है।healthians 5. केफिर केफिर एक फर्मेंटेड मिल्क ड्रिंक है, जिसमें बैक्टीरिया और यीस्ट की विभिन्न संस्कृतियां हो सकती हैं। यह दही से अलग स्वाद और बनावट वाला विकल्प है। लैक्टोज असहिष्णुता या डेयरी एलर्जी वाले लोग इसे लेने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें। 6. कांजी जैसी फर्मेंटेड सब्जियां किमची और सॉअरक्रॉट जैसी फर्मेंटेड सब्जियां गोभी, मूली और अन्य सब्जियों से बनाई जाती हैं। इनमें प्रोबायोटिक बैक्टीरिया हो सकते हैं, लेकिन पाश्चुरीकृत उत्पादों में जीवित बैक्टीरिया कम या नष्ट हो सकते हैं।apollohospitals 7. कोम्बुचा कोम्बुचा फर्मेंटेड चाय से बना पेय है। इसमें चीनी की मात्रा ब्रांड के अनुसार अलग-अलग हो सकती है, इसलिए खरीदते समय लेबल जरूर पढ़ें। डायबिटीज या ब्लड शुगर की चिंता वाले लोगों को कम-चीनी विकल्प चुनना चाहिए। इन्हें खाते समय ध्यान रखें “Live cultures” या “जीवित कल्चर” वाला उत्पाद चुनें। फर्मेंटेड फूड को बहुत ज्यादा गर्म करने से उसमें मौजूद जीवित सूक्ष्मजीव कम हो सकते हैं। अचार और किमची जैसे खाद्य पदार्थ कम मात्रा में लें, क्योंकि इनमें नमक अधिक हो सकता है। शुरुआत में थोड़ी मात्रा लें, खासकर यदि आपका पाचन तंत्र संवेदनशील है। गंभीर बीमारी या कमजोर इम्युनिटी की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लें। दही के अलावा छाछ, कांजी, इडली, डोसा, प्राकृतिक अचार, केफिर और कोम्बुचा जैसे विकल्प आहार में शामिल किए जा सकते हैं। हालांकि, प्रोबायोटिक फूड्स के साथ फाइबर युक्त भोजन—जैसे दालें, सब्जियां, फल और साबुत अनाज—लेना भी जरूरी है, क्योंकि फाइबर आंतों के लाभकारी बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करता है।
प्रोबायोटिक और प्रीबायोटिक में क्या अंतर है?
हमारी आंत में करोड़ों सूक्ष्मजीव रहते हैं, जो पाचन और संपूर्ण स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रोबायोटिक्स जीवित लाभकारी सूक्ष्मजीव होते हैं, जबकि प्रीबायोटिक्स ऐसे फाइबर होते हैं जो इन अच्छे बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करते हैं। प्रोबायोटिक क्या है? प्रोबायोटिक्स जीवित बैक्टीरिया या यीस्ट होते हैं, जिनका पर्याप्त मात्रा में सेवन करने पर स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है। ये आंत में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं। प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ दही और छाछ। इडली और ढोकला जैसे फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ। कांजी और अन्य प्राकृतिक रूप से फर्मेंटेड पेय। कुछ विशेष प्रोबायोटिक सप्लीमेंट। प्रीबायोटिक क्या है? प्रीबायोटिक्स ऐसे न पचने वाले फाइबर और पौधों से मिलने वाले यौगिक होते हैं, जिन्हें आंत के लाभकारी बैक्टीरिया इस्तेमाल करते हैं। सरल शब्दों में, प्रीबायोटिक्स अच्छे बैक्टीरिया का भोजन हैं।mdanderson प्रीबायोटिक खाद्य पदार्थ प्याज और लहसुन। केला, विशेषकर थोड़ा कच्चा केला। जई और साबुत अनाज। दालें और चना। फल, सब्जियां और मेवे। मुख्य अंतर आधार प्रोबायोटिक्स प्रीबायोटिक्स क्या होते हैं? जीवित लाभकारी सूक्ष्मजीव विशेष प्रकार के फाइबर मुख्य काम आंत में लाभकारी बैक्टीरिया जोड़ना या उनका समर्थन करना पहले से मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को पोषण देना उदाहरण दही, छाछ, फर्मेंटेड खाद्य पदार्थ प्याज, लहसुन, केला, दालें और जई दोनों को आहार में कैसे शामिल करें? संतुलित आंत स्वास्थ्य के लिए दोनों का सेवन किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, दोपहर के भोजन में दाल और सब्जियों के साथ दही लें। इससे आपको प्रीबायोटिक फाइबर और प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ दोनों मिल सकते हैं। फाइबर का सेवन अचानक बहुत अधिक बढ़ाने से गैस या पेट फूलने की समस्या हो सकती है। इसलिए प्रीबायोटिक खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे बढ़ाएं और पर्याप्त पानी पिएं। सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। निष्कर्ष प्रोबायोटिक्स आंत के लिए लाभकारी सूक्ष्मजीव हैं, जबकि प्रीबायोटिक्स उन्हें बढ़ने और सक्रिय रहने में मदद करने वाला फाइबर है। दही, छाछ, दालें, साबुत अनाज, फल और सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार आंत के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।
FOS क्या है? जानिए इस प्रीबायोटिक फाइबर के फायदे, स्रोत और सावधानियाँ
FOS क्या है? (What is in FOS?) FOS का फुल फॉर्म Fructooligosaccharides (फ्रुक्टो-ओलिगोसेकेराइड्स) होता है। यह एक प्रकार का प्रीबायोटिक फाइबर है जो हमारे शरीर में पचता नहीं, बल्कि सीधे बड़ी आंत तक पहुंचकर वहां मौजूद अच्छे बैक्टीरिया (जैसे Bifidobacterium और Lactobacillus) को खाना देता है| FOS में क्या होता है? रासायनिक रूप से FOS छोटी शर्करा इकाइयों—ग्लूकोज़ और फ्रुक्टोज़—से बना होता है, जो आपस में विशेष बंधनों (β(2→1) ग्लाइकोसिडिक बॉन्ड) से जुड़ी होती हैं। इनकी चेन छोटी होती है (आमतौर पर 2–60 इकाइयाँ), इसलिए इन्हें "ओलिगो" (छोटा) सेकेराइड कहते हैं।prebioticassociation प्राकृतिक स्रोत FOS कई पौधों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है:tandfonline+3 प्याज, लहसुन, लीक आर्टिचोक (ग्लोब और जेरूसलम) चिकोरी जड़ एस्पैरगस केला याकॉन रूट, ब्लू एगेव इनके अलावा, FOS को अक्सर फंक्शनल फूड्स, प्रीबायोटिक पाउडर, और कुछ डायबिटीज-फ्रेंडली स्वीटनर्स में भी जोड़ा जाता है FOS के संभावित फायदे गट हेल्थ: अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाता है, पाचन सुधारता है, कब्ज/दस्त में मददगार हो सकता है। इम्यूनिटी और सूजन कम करना: शॉर्ट-चेन फैटी एसिड (SCFA) बनाकर आंत की दीवार मजबूत करता है और सूजन कम करने में भूमिका निभा सकता है। मेटाबोलिक हेल्थ: कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर और वजन प्रबंधन में सहायक हो सकता है (हालांकि सब अध्ययन एक जैसे नतीजे नहीं देते)। मिनरल अब्सॉर्प्शन: आयरन, मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स के अवशोषण को बढ़ा सकता है। सावधानियाँ और साइड इफेक्ट्स FOS आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है (FDA/EFSA द्वारा GRAS), लेकिन कुछ लोगों में यह गैस, फूलना, पेट दर्द या दस्त पैदा कर सकता है—खासकर ज़्यादा मात्रा में या IBS/SIBO वाले लोगों में। इसलिए धीरे-धीरे शुरू करें और शरीर की प्रतिक्रिया देखें।

