Welcome to the world of sugar free joy!
Low Carb Sugar-Free Sweets & Cakes
Artinci was born out of Aarti's and Sumit's (Artinci's founders) abiding love for great-tasting dessert, while helping them stay committed to their health goals as well. As a result, Artinci makes delicious desserts with zero sugar, that are science and evidence-backed.
Aarti and Sumit come from a family of three generations of diabetics. They were themselves diagnosed pre-diabetic in 2012, and right there began a lifelong quest of a healthy, active lifestyle, including healthy swaps in food
Sugar free Sweets & Cakes
Sugar-Free Kaju Katli — 60% Premium Cashews, Stevia Sweetened | Artinci
Vanilla & Chocolate Marble Sugar-Free Cake — No Added Sugar, Keto, Gluten-Free (contains egg)
Aarti Laxman (Founder)
Artinci is founded by Aarti Laxman, a certified Metabolic coach in the Low-Carb Nutrition & Metabolic Health domain from dLife.in, India’s only legally tenable course in this subject—recognized by the NSDC (under the Ministry of Skill Development & Entrepreneurship, Govt. of India). It’s also internationally accredited by the CPD Standards Office UK, with a global record of 144 CPD hours—the highest for any course of its kind. The accreditation is both nationally valid and globally recognised in over 50+ countries..
Festive Gifting in Artinci
Let customers speak for us
All about Sugar and sugar-free
डायबिटीज में “3-घंटे का नियम” क्या है? डायबिटीज में 3-घंटे का नियम का मतलब है कि दो भोजन या स्नैक्स के बीच लगभग 3 घंटे का अंतर रखें, ताकि ब्लड शुगर में अचानक उतार-चढ़ाव कम हो। हालांकि, यह हर मरीज के लिए अनिवार्य नियम नहीं है—खासकर इंसुलिन या कुछ शुगर की दवाएं लेने वालों को अपनी दवा, गतिविधि और शुगर पैटर्न के अनुसार खाने का समय तय करना चाहिए। यह कैसे मदद करता है? लंबे समय तक खाली पेट रहने से कुछ लोगों में कम शुगर (hypoglycemia) का खतरा बढ़ सकता है, खासकर अगर इंसुलिन या सल्फोनिलयूरिया जैसी दवाएं ली जा रही हों।verywellhealth नियमित अंतराल पर संतुलित भोजन लेने से भूख नियंत्रित रहती है और अगली बार ज्यादा खाने की प्रवृत्ति कम हो सकती है।abplive खाने के बाद 1–2 घंटे में ब्लड शुगर बदलता है, इसलिए भोजन की मात्रा, कार्ब्स और फाइबर-प्रोटीन का संतुलन भी उतना ही जरूरी है।niddk.nih क्या हर 3 घंटे में खाना जरूरी है? नहीं। अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन की सिफारिशें “हर किसी के लिए एक जैसा शेड्यूल” के बजाय व्यक्तिगत योजना पर जोर देती हैं। कई लोगों के लिए 4–5 घंटे में मुख्य भोजन और जरूरत होने पर बीच में हल्का स्नैक भी उपयुक्त हो सकता है। व्यावहारिक तरीका सुबह का नाश्ता जागने के 1–1.5 घंटे के भीतर लें।webmd मुख्य भोजन के बीच लगभग 4–5 घंटे रखें; भूख या दवा की जरूरत हो तो बीच में स्नैक लें।webmd स्नैक में मैदा, चीनी या बिस्कुट के बजाय मूंगफली/भुने चने, दही, अंकुरित अनाज, फल-मेवे या सब्जियां चुनें। रात का खाना सोने से लगभग 3 घंटे पहले पूरा करना अक्सर बेहतर माना जाता है।superage अपनी दवा, इंसुलिन, वर्कआउट और ग्लूकोमीटर रीडिंग के अनुसार डायटिशियन या डॉक्टर से समय तय करवाएं।
खाना खाने के बाद वॉक करने के फायदे
खाना खाने के बाद 10–15 मिनट की हल्की वॉक पाचन सुधारने, ब्लड शुगर कंट्रोल करने और भारीपन कम करने में मदद कर सकती है। यह एक आसान आदत है, जिसे बिना किसी खास उपकरण के रोज़ अपनाया जा सकता है। खाने के बाद वॉक के फायदे पाचन बेहतर होता है: हल्की चाल पेट और आंतों की गतिविधि को सक्रिय करती है, जिससे भोजन आसानी से पच सकता है। ब्लड शुगर स्पाइक कम होता है: चलने से मांसपेशियां ग्लूकोज़ का उपयोग करती हैं, जिससे खाने के बाद शुगर तेजी से नहीं बढ़ती। गैस, सूजन और भारीपन कम हो सकता है: खाने के बाद बैठे रहने की बजाय टहलने से bloating और अपच की समस्या कम हो सकती है। एसिडिटी और रिफ्लक्स में मदद: खाने के तुरंत बाद लेटने से सीने में जलन बढ़ सकती है; हल्की वॉक इस जोखिम को कम कर सकती है। वजन नियंत्रण में सहायक: यह कैलोरी बर्न करने और दिनभर एक्टिव रहने में मदद करती है, हालांकि वजन घटाने के लिए संतुलित आहार भी जरूरी है। नींद और मूड बेहतर हो सकता है: शाम की हल्की वॉक स्ट्रेस कम करने और नींद की गुणवत्ता सुधारने में सहायक हो सकती है। दिनभर एनर्जी बनी रहती है: खाने के बाद की सुस्ती कम होती है और शरीर ज्यादा सक्रिय महसूस करता है। कितनी और कैसे वॉक करें? खाना खाने के 10–15 मिनट बाद 10 से 15 मिनट की हल्की वॉक करें। रफ्तार ऐसी रखें कि आप बात कर सकें; दौड़ना या तेज व्यायाम न करें।thehealthsite लंच और डिनर, दोनों के बाद यह आदत अपना सकते हैं। अगर गंभीर एसिडिटी, दर्द, चक्कर या पेट की पुरानी बीमारी है, तो डॉक्टर से सलाह लें।
शुगर कंट्रोल रिचुअल: रोज़ की छोटी आदतों से ब्लड शुगर रखें स्थिर
एक आसान दैनिक दिनचर्या है, जिसमें सही भोजन, हल्की हरकत, नींद और तनाव-प्रबंधन को मिलाकर ब्लड शुगर को स्थिर रखा जाता है। यह कोई जादुई उपाय नहीं, बल्कि छोटी-छोटी नियमित आदतों का संयोजन है। यह रिचुअल भोजन को संतुलित बनाने, खाने के बाद हल्की वॉक करने, फाइबर और प्रोटीन बढ़ाने, तथा नियमित नींद और स्ट्रेस मैनेजमेंट पर आधारित है। फाइबर युक्त भोजन शुगर को धीरे-धीरे रिलीज़ करने में मदद करता है, जिससे अचानक स्पाइक कम होते हैं। दिनभर का आसान रिचुअल सुबह: उठते ही पानी पिएं और 10–15 मिनट हल्की स्ट्रेचिंग या वॉक करें। नाश्ता: साबुत अनाज, दाल, दही, अंडा, पनीर या सब्ज़ी जैसे प्रोटीन-फाइबर वाले विकल्प चुनें। भोजन का क्रम: पहले सलाद/सब्ज़ी, फिर प्रोटीन, और अंत में रोटी-चावल खाएं। खाने के बाद: 10–15 मिनट तेज़ चलें; यह पोस्ट-मील शुगर को मैनेज करने में मदद कर सकती है।ganeshdiagnostic दोपहर/शाम: मीठे स्नैक्स की जगह मूंगफली, छाछ, मुरमुरा, फल या भुने चने रखें। रात: हल्का और जल्दी डिनर करें, नींद का समय नियमित रखें और स्क्रीन-टाइम कम करें। तनाव और अनियमित नींद ब्लड शुगर को प्रभावित करते हैं।fortishealthcare किन चीज़ों से बचें? चीनी वाली चाय, मीठे पेय, मैदा, बिस्कुट, पैकेटेड जूस और तले हुए स्नैक्स बार-बार शुगर स्पाइक का कारण बन सकते हैं। इन्हें पूरी तरह छोड़ने के बजाय मात्रा धीरे-धीरे कम करें और उन्हें प्रोटीन या फाइबर वाले खाने के साथ लें। ज़रूरी बात यह रिचुअल डायबिटीज़ की दवा या डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। डायबिटीज़ होने पर ग्लूकोमीटर, HbA1c और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का नियमित ध्यान रखना ज़रूरी है।
5 अनाज/अनाज उत्पाद जिनसे बचना चाहिए
सभी अनाज खराब नहीं होते—समस्या ज़्यादातर रिफाइंड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड अनाज उत्पादों से होती है, जो फाइबर और पोषक तत्वों से कम होते हैं और ब्लड शुगर तेज़ी से बढ़ा सकते हैं। 1. मैदा (रिफाइंड गेहूं का आटा) मैदा से बने नान, कुलचा, बिस्किट, पेस्ट्री, समोसे और बर्गर बन्स फाइबर से वंचित होते हैं। ये जल्दी पचते हैं, जिससे भूख जल्दी लगती है और वजन व ब्लड शुगर नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।naturalgrocers बदलाव: गेहूं का चक्की-आटा, बाजरा या ज्वार का आटा चुनें। 2. सफेद ब्रेड और बेकरी प्रोडक्ट्स सफेद ब्रेड, रस्क, क्रीम बिस्किट और मैदा-आधारित सैंडविच ब्रेड में रिफाइंड कार्ब्स होते हैं। नाश्ते में इन्हें अकेले खाने से एनर्जी तेज़ी से ऊपर-नीचे हो सकती है।naturalgrocers बदलाव: मल्टीग्रेन, खमीर वाला या चक्की-आटे का ब्रेड चुनें और उसके साथ प्रोटीन जैसे अंडा, पनीर या दही लें। 3. इंस्टेंट नूडल्स और मैगी इंस्टेंट नूडल्स आमतौर पर मैदा से बनते हैं और इनमें नमक, फ्लेवर एन्हांसर तथा प्रिज़र्वेटिव ज़्यादा हो सकते हैं। ये तो तुरंत बनाने में आसान हैं, लेकिन पोषण में संतुलित भोजन नहीं होते।ndtv बदलाव: वेजिटेबल प्रोटीन के साथ दलिया, पोहा, ओट्स या मिलेट नूडल्स बेहतर हैं। 4. सफेद चावल का अधिक सेवन सफेद चावल स्वयं “खराब” नहीं है, लेकिन बड़ी मात्रा में, बिना सब्ज़ी-दाल-प्रोटीन के खाने पर ब्लड शुगर तेज़ी से बढ़ सकती है। रिफाइंड अनाज कार्बोहाइड्रेट अधिक देते हैं और फाइबर कम।naturalgrocers बदलाव: चावल की मात्रा घटाएं, सब्ज़ी, दाल, दही या प्रोटीन के साथ खाएं; ब्राउन राइस, हैंड-पाउंडेड राइस या मिलेट आज़माएं। 5. पैकेज्ड ब्रेकफास्ट सीरियल्स और कॉर्न फ्लेक्स कई “healthy” लिखे सीरियल्स, कॉर्न फ्लेक्स और चोको-सीरियल्स में चीनी अधिक होती है। ये अल्ट्रा-प्रोसेस्ड हो सकते हैं और नाश्ते में शुगर स्पाइक का कारण बन सकते हैं।ndtv बदलाव: प्लेन रोल्ड ओट्स, मूंग दाल चीला, इडली, दलिया या बेसन चीला चुनें। ध्यान रखने योग्य बात ग्लूटन एलर्जी, सीलिएक रोग या डॉक्टर की सलाह होने पर ही गेहूं/जौ जैसे ग्लूटन अनाज पूरी तरह हटाएं। “ग्लूटन-फ्री” का मतलब स्वास्थ्यवर्धक नहीं होता; कई पैकेज्ड ग्लूटन-फ्री उत्पादों में नमक, चीनी और फैट अधिक हो सकता है।ndtv अनाज को सब्ज़ी, दाल, दही, अंडा या प्रोटीन के साथ खाने से ब्लड शुगर बेहतर रहती है।

