अलुलोज बनाम एरिथ्रिटॉल: गट माइक्रोबायोम पर प्रभाव की तुलना
परिचय
डायबिटीज महामारी में भारत में अलुलोज (D-allulose) और एरिथ्रिटॉल जैसे रेयर शुगर और शुगर अल्कोहल लोकप्रिय हो रहे हैं। ये जीरो-GI वाले हैं और गट माइक्रोबायोम को प्रभावित करते हैं, जो इम्यूनिटी और ब्लड शुगर कंट्रोल से जुड़ा है। यह तुलना हालिया अध्ययनों पर आधारित है।
अलुलोज का माइक्रोबायोम प्रभाव
अलुलोज कोलन में पहुंचकर ब्यूटिरेट उत्पादन 6-24 घंटे में तेजी से बढ़ाता है। यह Anaerostipes hadrus और Lachnospiraceae को बढ़ावा देता है, जो T2DM रोगियों में भी फायदेमंद। हाई-फैट डाइट वाले चूहों में Lactobacillus और Coprococcus बढ़े, वजन घटाने में मदद। अल्फा डाइवर्सिटी सुधारता है।
एरिथ्रिटॉल का माइक्रोबायोम प्रभाव
एरिथ्रिटॉल 24-48 घंटे में ब्यूटिरेट बढ़ाता है और Eubacteriaceae, Barnesiellaceae परिवारों को प्रभावित करता है। स्वस्थ और डायबिटीज वाले दोनों में वृद्धि, लेकिन प्रजाति स्तर पर कम प्रभाव। हाई-फैट डाइट में कोई बड़ा बदलाव नहीं, लेकिन सुरक्षित। कुछ मामलों में GI असहजता संभव।
तुलना तालिका
भारतीय डाइट में टिप्स
मिलेट रोटी में अलुलोज या एरिथ्रिटॉल मिलाकर लो-GI डाइट बनाएं। दही के साथ लें प्रोबायोटिक सपोर्ट के लिए। डायबिटीज रिवर्सल के लिए डॉक्टर से सलाह लें, कम मात्रा से शुरू करें।
निष्कर्ष
अलुलोज गट हेल्थ के लिए बेहतर लगता है, खासकर डायबिटीज में, लेकिन दोनों सुरक्षित। मानव अध्ययन बढ़ने की जरूरत।
- https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/40312039/